Friday, October 24, 2008

मोली की कहानी

मोली, कितना प्यारा नाम हैं ना ? नन्ही ३ साल की हैं अभी। नाम जैसा प्यारा हैं उतनी ही प्यारी गुडिया सी हैं मोली।अपने खेल खिलौने से बहुत प्यार हैं उसे। उसका एक सॉफ्ट टेड्डी हैं, जिसे वो बाबु बुलाती हैं, वो बाबु से लिपटकर सोती थी। उसे एक पल भी आंखों से बाबु दूर होता तो वो बेचैन हो जाती थी। रो रोकर बुरा हाल हो जाता था। पर उसकेमम्मी पापा गंदे हैं, मैं नही मोली कहती हैं। मम्मी पापा आपस में लड़ते रहते हैं। उनकी लड़ाई के चक्कर में मोली का बाबु दिल्ली में छूट गया, और पापा भी दिल्ली में रह गए। और मम्मी आ गई अपने मम्मी पापा के पास। पर मोली क्या करे, बाबु से दूर, पापा से दूर?

चाचू की शादी में मोलू दादी के घर आई। पहली बार। हाँ जन्म के तुंरत बाद से hi वो दादी के घर से माँ के घर, माँ के घर से नानी के घर, नानी के घर से अपने पापा के दिल्ली वाले घर, फ़िर मामा के घर, और अब फ़िर माँ के घर... घूम ही रही हैं। लेकिन मोलू से किसी ने नही पूछा की " मोलू कहाँ जाना हैं?" कहाँ रहना हैं ? हाँ मोलू पहली बार दादी के घर आई, जैसे रौनक आ गई हो घर में। नई चाची की उतनी पूछ नही थी, जितनी मोली की थी। पापा भी आए , दादी-दादा, चाची-चाचा, बुआ, और पापा-मम्मी सभी मोली को कितना प्यार करते हैं। मोली बहुत खुश हैं यहाँ सबके साथ, बस एक गम हैं बाबु नही आया उसके चाचू की शादी में। फ़िर भी मोली इतने में भी बहुत खुश थी। सबका साथ जो था। पर फ़िर मम्मी ले गई उसे नानी के घर। मोली समझ कहाँ पाती थी की मम्मी पापा लड़ते क्यूँ हैं, वो छोटी सी जान कैसे समझती जब वो दोनों ही नही समझ पा रहे थे। और हम ही कहाँ समझ गए? बहुत दिमाग पर जोर डालते तो इतना समझ आता की दोनों के विचार नही मिलते, आपस में समझ नही हैं, टेम्परामेंट नही मिल रहे। लेकिन इन सबमे मोली की क्या गलती ?रंजन और रजनी, जिस दिन शादी हुयी दोनों कितने खुश थे, दोनों विवाह के वक्त व्यस्क थे, और एक दूसरे को देखकर पसंद किया था, अकेले मिलने का मौका भी दिया गया था उनको, और सगाई से शादी तक का जो वक्त गुजरा उसमे वो घंटो फ़ोन पे बातें किया करते, परिवार वाले भी खुश थे दोनों के, देर से विवाह हो रहा था पर उपयुक्त जोड़ा मिला था। कुंडली भी मिलायी गई, ग्रह दोष शान्ति के लिए पूजा भी करायी गई। कुंडली तो मिल गई, पर विचार नही मिले, शादी तो हो गई पर मन का मेल ? वैवाहिक जीवन के आरम्भ में सब कुछ अच्छा था, पर धीरे धीरे टकराव शुरू हुआ । दो व्यक्तियो का टकराव, अहम् का टकराव । मोली भी जल्दी ही आ गयी।

रजनी को बहुत प्यार मिला था अपने मम्मी पापा से , पर ज्यादा प्यार भी इन्सान को कमजोर बना देता हैं।मायके में मिले अत्यधिक प्यार दुलार ने , और राजनीती विज्ञान की मास्टर्स और एल एल बी की डिग्री ने रजनी को अभिमानी बना दिया था, वही रंजन भी घर का सबसे बड़ा लड़का, घर की जिम्मेदारियो में उलझा अपनी माँ और पत्नी दोनों के लिए कर्तव्य पालन, कोशिश बहुत की की सब कुछ सुलझा रहे , दोनों ने कोशिश की पर...पत्नी और मोली के मोह, उनके प्रति अपने कर्तव्य को समझते हुए रंजन ने रजनी की बात मान ली।

रंजन अपनी नौकरी छोड़कर दिल्ली आ गया।दिल्ली शहर हैं दिलवालों का, कहते हैं लोग, पर दिल से काम नही चलता , रोटी कपड़ा और मकान, सब चाहिए। रंजन दिल्ली तो आ गया रजनी और मोली को लेकर पर यहाँ ढेर सारी moosibte सीना ताने खड़ी थी सामने। बैंक में जो कुछ रखा था रंजन के पास उसमे से आधा तो मोली के जन्म और उसकी पार्टी में ख़तम हो गया और बाकी दिल्ली आने और यहाँ घर बसाने में। पर घर ही नही बसा, घर फ्रीज, टीवी , पलंग और बर्तनों से नही बसता , घर बसता हैं प्रेम से। और प्रेम में, एक छोटी सी फांस ही काफ़ी हैं, दिवार करने में।

आज मोली ने ऐ फॉर एप्पल बोलना सीखा, रजनी सबसे पहले ये रंजन को ही सुनाना चाहती थी, पर कल शाम फ़ोन पे हुयी बहश ने रजनी का इरादा बदल दिया। अब तो कुछ ऐसा हो चला था की रजनी को रंजन की आवाज से भी इर्रिटेशन होने लगी थी। कितनी तल्खियां आ गई पिछले कुछ ही सालो में। जो कान जीस आवाज को सुनने को तरसते रहते थे, इंतज़ार रहता था अब फ़ोन आए, अब आएगा, काम में व्यस्त होगे, चलो शाम को तो आना ही हैं, ऐसे । पर अब उस आवाज में इतनी कड़वाहट कहाँ से घुल गई, की कानो में चुभने लगे, नश्तर की तरह ?रजनी घर में आई दुल्हन बनकर, कितने अरमान लेकर, हजारो सपने लेकर। अब कंप्यूटर पापा ने सहारा का दे दिया तो इससमे उसका क्या दोष। और ये सब बातें तो खुली किताब की तरह थी रंजन के घरवालो के सामने, की रजनी के घरवाले सिमित खर्च ही कर सकते हैं। रजनी के पापा से जो बन पड़ा किया, बरात की खूब आवभगत हुयी। बड़ा स्वागत सत्कार हुआ। माँ और सास , एक ही औरत , पर् डेजिग्नेशन का बहुत फर्क पड़ जाता हैं। माँ नर्स होती हैं, और सास डॉक्टर। आप अगर कभी हॉस्पिटल में एडमिट हुए होगे तो ये फर्क आप समझ सकते हैं। पर् सास अगर डॉक्टर तक रहे तो सब कुछ ठीक रहता हैं, लेकिन अगर dictator बन जाए? इस फर्क को औरत को समझना चाहिए। अपनी बेटी और परायी बेटी से अगर एक सा व्यवहार अगर हर औरत करने लगे तो ? एकता कपूर को स्क्रिप्ट्स कहाँ से मिलेगी ?

2 comments:

Richa said...
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Richa said...

humare blog par bhi aayiye..aur ek comment karke jayiye..